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व्यस्त जीवन में किस तरह अपने बच्चो का ख्याल रखें

दोस्तों, जिदगी में आप कहीं भी हों, कुछ भी कर रहे हों लेकिन जब आप पिता बनने की जिम्मेवारी सँभालते हैं तो आपके जीवन में बहुत से बदलाव आते हैं | इन बदलावों में बहुत बार माता पिता बच्चों का पूरा ध्यान नहीं रख पाते |

ऐसे में बच्चे बहुत अकेला महसूस करते हैं | बच्चे अकेला रहने पर बच्चे तनाव का शिकार भी हो जाते हैं | छोटे बच्चे कच्ची मिटटी की तरह से होते हैं | जिस तरह से एक कुम्हार मिटटी को अलग अलग के बर्तन में ढाल देता है उसी तरह से माता पिता बच्चों के साथ जिस तरह का व्यव्हार करते हैं, बच्चे वैसे ही हो जाते हैं |

ऐसे में हमे चाहिए की हम अपने बच्चों का ख्याल रखें | हम उन्हें अकेलेपन का एहसास नहीं होने दें | बच्चों के साथ प्यार से पेश आना चाहिए | माता पिता को चाहिए कि वो बच्चों के सामने कभी भी ऐसा कुछ नहीं करें जिससे बच्चे के मन पर बुरा प्रभाव पड़े |

बच्चों को अपने परिवार के नियमों के बारे में बताना चाहिए | बच्चों से बहुत ज्यादा अपेक्षाएं नहीं रखनी चाहिए और बच्चा अपने जीवन में जो करना चाहता है उसे करने देना चाहिए |

अक्सर देखा गया है कि माँ बाप अपने सपने पूरा करने के चक्कर में बच्चो को वो सब करने को कहते हैं जिसमें बच्चे का कोई भी इंटरेस्ट नहीं होता |

आइये जानते हैं आप किस तरह से व्यस्त रहते हुए भी बच्चे का ख्याल रख सकते हैं | (Child Care in Busy Life)

बच्चे के साथ समय बिताये :

हम जानते हैं काम कितना जरूरी है लेकिन काम के साथ बच्चों को समय देना भी उतना ही जरूरी है | इसिलए जब भी आपको काम से फुर्सत मिले आप अपने बच्चों के साथ समय बिताएं | छुट्टी वाले दिन काम को छोड़ कर परिवार के साथ कहीं बाहर घुमने जायें ताकि आपके परिवार के साथ आप ज्यादा अच्छा समय व्यतीत कर पाएं |

इन्टरनेट का सही इस्तेमाल बताये :

आज के समय में technology का इस्तेमाल बहुत बढ़ता जा रहा है और बच्चों से लेकर बूढ़े तक technology के लिए पागल से हो गये हैं | ऐसे समय में बच्चों को technology के कुप्रभाव से बचाना भी माता पिता का ही कर्तव्य है | माता पिता को ध्यान रखना चाहिए की उनके बच्चे क्या इन्टनेट का सही इस्तेमाल कर रहे हैं | इन्टरनेट का प्रयोग जरूरी है लेकिन सही दिशा निर्देश के साथ | इसिलिए आप अपने कंप्यूटर या मोबाइल में ऐसे एंटीवायरस रखें जो जिससे बच्चे गलत websites तक नहीं पहुँच सकें |

बच्चों से बात करें :

व्यस्त जीवन में भी बच्चों का ख्याल रखा जा सकता है | इसके लिए आप जब सुबह काम के लिए निकलें तब अपने बच्चों से बात करें | रात्रि में काम से वापिस आने के बाद भी बच्चे से बात करें | जब आप बच्चे से बात करेंगे उससे दिन भर में उसने स्कूल में क्या किया ये पूछें | उसके दोस्त और अध्यापक उसके साथ कैसा व्यव्हार करते हैं ये जानने की कोशिश करें | बच्चे को एहसास दिलाएं कि आप उसके दोस्त हैं और वो आपको सब कुछ बता सकता है | ऐसे में बच्चा हर परिस्थिति में आपसे कुछ नहीं छुपायेगा |

दुसरे बच्चों से compare नहीं करे :

ज्यादातर माँ बाप अपने बच्चे को यही कहते पाए जाते हैं कि पडोसी के बच्चे के इतने मार्क्स आयें हैं | पडोसी का बच्चा ये करता है वो करता है | ऐसा करके आप बच्चे को हीन भावना का शिकार बना रहे हैं | ऐसे करने से बच्चे के मन में बैठ जाता है कि वो बेहतर नहीं कर सकता | इसीलिए कभी अपने बच्चे को किसी से compare नहीं करें | बल्कि अगर आपका बच्चा भी कहता है कि उसके मार्क्स अच्छे नहीं आये तो भी आप उसे कहें की वो दुसरे बच्चों से कहीं बेहतर है | किसी दूसरी फील्ड में वो उन बच्चों से कहीं ज्यादा अच्छा प्रदर्शन कर सकता है |

ज्यादा लाड प्यार नहीं करें  :

ये सही है कि बच्चे को पीटना नहीं चाहिए लेकिन बच्चे से इतना ज्यादा लाड प्यार भी नहीं करें कि बच्चा बिगड़ जाये | अगर बच्चा गलती करता है तो उसे तुरंत टोकें उसे बताये कि ये गलत है | गलती करने पर नहीं टोकने से बच्चा बिगड़ सकता है | अगर आप उसे गलती करने पर तुरंत टोक देंगे तो उसे पीटने की नौबत नही आएगी |

Mohan Lal

मेरा नाम मोहन है | मैं एक हेल्थ एंड फिटनेस ब्लॉगर हूँ और अपने ब्लॉग पर आयुर्वेदिक और प्राकर्तिक उपायों की मदद से स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं के समाधान के बारे में लिखता हूँ | मेरा लक्ष्य है कि में प्राकर्तिक नुस्खों जो हमारा प्राचीन विज्ञान है कि मदद से लोगो की जिंदगी से रोगों को दूर भगा सकूँ |

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